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time:2021-10-27 07:21:25 देश में साइबर सुरक्षा के लिये कोई ‘जवाबदेह’ केंद्रीय संगठन नहीं: राजेश पंत Views:4591

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नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (भाषा) देश में कई साइबर सुरक्षा संगठन हैं लेकिन ऑनलाइन क्षेत्र में सुरक्षा के लिए कोई जवाबदेह केंद्रीय निकाय नहीं है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक (एनसीएससी) राजेश पंत ने मंगलवार को यह कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति सुरक्षा व्यवस्था के तहत इस अंतर को दूर करेगी।

पंत ने कहा कि भारत में उत्कृष्ट संगठन हैं और पिछले एक साल में देश में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में ‘शानदार’ बदलाव हुए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर एक व्यवस्था मौजूद है लेकिन संचालन से जुड़े नियमों को लागू करने को लेकर आज कोई शीर्ष केंद्रीय संगठन नहीं है। ऐसा कोई मंत्रालय या संगठन नहीं है जिसके लिए यह कहा जा सके कि आप देश की साइबर सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।’’

माइक्रोसॉफ्ट के ‘ऑनलाइन’ साइबर सुरक्षा वार्ता कार्यक्रम में पंत ने कहा, ‘‘यह पहली चीज है जिससे हमें निपटना है और यह रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार 2013 में विकसित साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रही है।

पंत ने कहा, ‘‘अब हमें साइबर सुरक्षा रणनीति की जरूरत है। यह अंतिम मंजूरी के लिये मंत्रिमंडल के पास है। हमें संचालन के स्तर पर ढांचे की जरूरत है। अगर आज आप विभिन्न मंत्रालयों के अंतर्गत काम करने के अपने तरीकों को देखें, हमने अच्छे संगठन प्राप्त किये हैं।’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2020 को घोषणा की थी कि देश में एक नई साइबर सुरक्षा रणनीति पेश की जाएगी, क्योंकि आने वाले वर्षों में साइबर क्षेत्र पर निर्भरता कई गुना बढ़ने वाली है।

आधिकारिक अनुमान के अनुसार, भारत को 2020 में साइबर हमलों से करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

पंत के अनुसार, महामारी के दौरान साइबर हमलों में 500 प्रतशत की वृद्धि हुई। इसका कारण डिजिटलीकरण को अपनाना है। भारत सबसे अधिक हमलों का सामना करने वाले देशों में से एक रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने पाया इन हमलों मे से 30 प्रतिशत से अधिक अमेरिका से हुए।’’

(This story has not been edited by economictimes.com and is auto–generated from a syndicated feed we subscribe to.)
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नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (भाषा) उपभोक्ता पिछले साल की तुलना में इस वर्ष त्योहारों में खरीदारी को लेकर अधिक उत्साहित हैं। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) को उम्मीद है कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर नहीं आएगी और ऐसे में इस साल त्योहारों पर बाजारों में रौनक रहेगी। आरएआई तथा लिटमसवर्ल्ड के सालाना त्योहारी खरीदारी सूचकांक के अनुसार सबसे ज्यादा उपभोक्ता परिधानों की खरीद करना चाहते हैं। उसके बाद घरेलू उपकरणों का नंबर आता है। इस सर्वे में पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी के 1,000 उपभोक्ताओं की राय को शामिल किया गया है। 63 प्रतिशत लोगों ने कहा किभारतीय नियामकों का ऐसी करेंसी को लेकर रुख स्पष्ट नहीं है. उन्‍होंने साफ-साफ कुछ भी नहीं कहा है कि भारतीय इनमें ट्रेड करें या नहीं.इंटरनेशनल फंड के बारे में जानिए अपने हर सवाल का जवाब

अधिकतर निवेशक इक्विटी फंड्स में निवेश करने के लिए सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप) को तरजीह देते हैं. हाल के समय में सिप को बहुत अधिक लोकप्रियता मिली है.नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा भारत के संभावित वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित कर छह प्रतिशत करना ‘अत्यधिक कम अनुमान’ है। 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने मंगलवार को यह बात कही। आईएमएफ ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से भारत की वृद्धि की संभावना को नीचे किया है। सिंह ने अध्ययन एवं औद्योगिक विकास संस्थान (आईएसआईडी) द्वारा ‘विकास के लिए वित्तपोषण’ विषय पर आयोजित ‘ऑनलाइन’ परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि जो लोग अभी गरीबी से बचे हुए हैं, वे महामारीवित्तीय लक्ष्‍यों तक जल्दी पहुंचने के लिए इक्विटी या डेट फंड में से किसमें निवेश करें?

नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (भाषा) बहुपक्षीय विकास संस्थान एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) ने मंगलवार को कहा कि वह भारत को भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिये स्वास्थ्य संबंधी ढांचागत सुविधाओं को मजबूत बनाने में सहयोग करेगा। बीजिंग स्थित वित्तपोषण संस्थान ने कहा कि वह जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम ढांचागत परियोजनाओं के विकास को लेकर भारत सरकार के साथ काम कर रहा है। एआईआईबी के अध्यक्ष जिन लिक्यून ने सालाना बैठक के दौरान अलग से ‘ऑनलाइन’ सम्मेलन में कहा, ‘‘जब हम परियोजना प्रस्तावों की जांच करते हैं, तो हम यह सुनिश्चित करने के लिए भारतनिवेशकों के सोने का आकर्षण बढ़ा है. वित्त वर्ष 2020-21 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में निवेशकों ने 6,900 करोड़ रुपये डाले.म्यूचुअल फंडों का एयूएम 41% बढ़कर 31.43 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

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शेयरों में निवेश से जुड़े जोखिम के अलावा इंटरनेशनल फंड में निवेश से करेंसी का जोखिम भी जुड़ा होता है. दूसरे देश की मुद्रा के मुकाबले रुपये में कमजोरी और मजबूती का असर आपके रिटर्न पर पड़ता है.

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