रूले नकद खेल

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time:2021-10-27 08:27:22 म्‍यूचुअल फंडों के एक्सपेंस रेशियो के बारे में यहां जानिए सब कुछ Views:4591

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यह म्यूचुअल फंड के प्रबंधन पर आने वाले खर्च को प्रति यूनिट में बताता है.
  1. म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम में एक्सपेंस रेशियो क्‍या होता है?
    एक्सपेंस रेशियो एक तरह का अनुपात है. यह म्यूचुअल फंड के प्रबंधन पर आने वाले खर्च को प्रति यूनिट में बताता है. किसी म्यूचुअल फंड स्‍कीम का एक्सपेंस रेशियो कैलकुलेट करने के लिए उसके एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) में कुल खर्च से भाग दिया जाता है. दरअसल, फंड हाउस के पास प्रशिक्षित पेशेवरों की एक होती टीम है. यही टीम मार्केट और कंपनियों पर नजर रखती है. किसी शेयर को खरीदने या उससे निकलने के फैसले भी यही लेती है. इसके साथ ही एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एमएमसी) ट्रांसफर और रजिस्ट्रार से संबंधित खर्च, कस्टोडियन, लीगल व ऑडिट का खर्च, स्कीम की मार्केटिंग और उसके डिस्ट्रीब्यूशन का खर्च भी उठाती है. ये सभी खर्च म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदने वाले ग्राहक से ही लिए जाते हैं. किसी म्यूचुअल फंड स्कीम की नेट एसेट वैल्यू इस तरह के खर्च को घटाने के बाद निकाली गई वैल्यू है.

  2. डायरेक्‍ट प्‍लान की तुलना में रेगुलर प्‍लान का एक्सपेंस रेशियो ज्‍यादा क्‍यों होता है?
    डायरेक्‍ट प्‍लान की पेशकश फंड हाउस सीधे करते हैं. यानी म्‍यूचुअल फंड कंपनी से इन प्‍लान को सीधे खरीदा जा सकता है. वहीं, रेगुलर प्‍लान इंडिपेंडेंट फाइनेंशियल एडवाइजर, बैंक या एनबीएफसी जैसे इंटरमीडियरी या डिस्ट्रीब्यूटरों के जरिये खरीदे जा सकते हैं. म्‍यूचुअल फंड कंपनी इंटरमीडियरी को कमीशन देती हैं. इसे प्‍लान के एक्‍सपेंस रेशियो के तौर पर वसूला जाता है. यही कारण है कि रेगुलर प्‍लान का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है.


  3. म्‍यूचुअल फंड के एक्सपेंस रेशियो के लिए क्‍या सीमा तय है?
    बाजार नियामक सेबी ने एक्सपेंस रेशियो की सीमा तय की हुई है. ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम के एयूएम के आधार पर सेबी ने विभिन्न स्‍लैब बनाए हैं. जिन स्कीम का एयूएम 500 करोड़ रुपये है, वे एक्सपेंस रेशियो के रूप में अधिकतम 2.25 फीसदी चार्ज कर सकती हैं. 500-750 करोड़ रुपये एयूएम वाली स्कीम के लिए एक्सपेंस रेशियो 2 फीसदी है. 750-2,000 करोड़ रुपये वाली स्‍कीमों के लिए एक्सपेंस रेशियो 1.75 फीसदी, 2,000-5,000 करोड़ एयूएम वाली स्कीम के लिए 1.6 फीसदी और 5000-10,000 करोड़ रुपये एयूएम वाले फंड के लिए एक्सपेंस रेशियो 1.5 फीसदी हो सकता है. सेबी के निर्देश के मुताबिक, 10,000-50,000 करोड़ एयूएम वाली स्कीम के लिए एक्सपेंस रेशियो हर 5000 करोड़ रुपये बढ़ने के बाद 0.05 फीसदी कम होता चला जाएगा. अगर किसी म्यूचुअल फंड स्कीम का एयूएम 50,000 करोड़ से अधिक है तो उसके लिए एएमसी एक्सपेंस रेशियो के रूप में 1.05 फीसदी चार्ज ले सकती है.


  4. क्‍या म्‍यूचुअल फंड के एक्‍सपेंस रेशियो का रिटर्न पर असर पड़ता है?
    एक्सपेंस रेशियो बताता है कि आपके निवेश पोर्टफोलियो के प्रबंधन के लिए फंड आपसे कितनी फीस वसूल रहा है. अगर आप 2 फीसदी एक्‍सपेंस रेशियो वाली स्‍कीम में 10,000 रुपये निवेश करते हैं तो इसका मतलब यह है कि इस रकम के प्रबंधन के लिए आपको 200 रुपये की फीस चुकानी होगी. इस तरह अगर फंड का रिटर्न 12 फीसदी और उसका एक्‍सपेंस रेशियो 2 फीसदी है तो आप 10 फीसदी रिटर्न कमाएंगे. इस तरह कम एक्सपेंस रेशियो का मतलब अधिक मुनाफा है. वहीं, एक्सपेंस रेशियो अधिक होने का मतलब मुनाफा घटना है. हालांकि, यह सही है कि ज्‍यादा एक्‍सपेंस रेशियो का फंड के रिटर्न पर असर पड़ता है. लेकिन, यह जरूरी नहीं है कि हमेशा अधिक एक्सपेंस रेशियो का मतलब कम मुनाफा ही हो. निवेशकों को स्‍कीम चुनने में कई अन्‍य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए.


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अगर आप युवा (20 के पड़ाव में) हैं और रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करना चाहते हैं तो आपका निवेश इक्विटी म्‍यूचुअल फंड में ज्‍यादा होना चाहिए.यूनिट लिंक्ड इंश्‍योरेंस प्‍लान यानी यूलिप और म्यूचुअल फंड कई मायनों में अलग होते हैं. यह और बात है कि कई लोग इन्‍हें एक जैसा प्रोडक्ट समझने की भूल कर बैठते हैं. आपको भी अगर ऐसी गलतफहमी है तो यहां हम इन दोनों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतरों के बारे में बता रहे हैं.एनपीएस में निवेश की उम्र सीमा बढ़कर हो सकती है 70 साल!

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