लूडो सिंह

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time:2021-10-27 21:02:39 सैलरी और पर्क्‍स के पेमेंट के लिए कंपनियों ने शुरू किया क्रिप्‍टोकरेंसी का इस्‍तेमाल Views:4591

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क्रिप्‍टोकॉइन में पेमेंट की योजना बनाने वाली कंपनियों ने खुद को क्रिप्‍टो-फ्रेंडली देशों में रजिस्‍टर कराया है.
हाल के कुछ समय में युवाओं की क्रिप्‍टोकरेंसी में दिलचस्‍पी बढ़ी है. इसे देखते हुए नए युग की टेक्‍नोलॉजी कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को उनकी सैलरी का कुछ हिस्‍सा, बोनस या अन्‍य इंसेंटिव क्रिप्‍टोकरेंसी में दे रही हैं. कंपनियों के लिए यह पेमेंट का आसान और तेज तरीका है. वहीं, क्रिप्‍टोकरेंसी के बढ़ते मूल्‍य कर्मचारियों को लुभा रहे हैं.

कंपनियों ने इसके लिए दो तरीके अपनाएं हैं. पहला, खुद को क्रिप्‍टो-फ्रेंडली देशों में रजिस्‍टर कराना और कानूनी या टैक्‍स संबंधी अड़चनों से कर्मचारियों को बचाने के लिए क्रिप्‍टोकरेंसी में उन्‍हें पेमेंट करना है. दूसरा, पेमेंट का रिकॉर्ड रुपये में ट्रांजैक्‍शन के तौर पर अपने बहीखातों में दर्ज करना है.

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यह कैसे काम करता है?
- क्रिप्‍टो कॉइन में पेमेंट की योजना बनाने वाली कंपनियों ने खुद को क्रिप्‍टो-फ्रेंडली देशों में रजिस्‍टर कराया है.
- कंपनियों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि रुपया क्रिप्‍टो कॉइन में कन्‍वर्ट हो सके और रुपये ट्रांजैक्‍शन के तौर पर पेमेंट रिकॉर्ड हों.
- ऐसी ज्‍यादातर कंपनियां टीथर (यूएसडीजी) का इस्‍तेमाल करती हैं. ये ज्‍यादा स्थिर क्रिप्‍टोकरेंसी हैं. इसका कन्‍वर्जन 1 डॉलर से सीधे 1 यूएसडीटी में हो जाता है.
- अन्‍य इथीरियम, प्‍लास टोकन और ऑडियो कॉइन में पेमेंट करती हैं.

देश में स्थिति नहीं है साफ
देश में क्रिप्‍टोकरेंसी को लेकर स्थिति बहुत साफ नहीं है. कर्मचारी और कंपनियां दोनों इसे लेकर टैक्‍स के बारे में चिंतित हैं. चेन एसेट्स कैपिटल नाम के क्रिप्‍टो हेज फंड के प्रमुख उपिंदर प्रीत सिंह ने कहा कि भारत में क्रिप्‍टोकरेंसी की मान्‍यता को लेकर बहुत से नियम हैं. इनमें स्‍पष्‍टता का भी अभाव है.

पटना में रहने वाले कंसल्‍टेंट सुजीत कुमार ने कहा, ''क्रिप्टोकरेंसी एक्‍सचेंज के जरिये ऑल्‍टकॉइन को भुनाने के बाद मैंने इस रकम को टैक्‍स रिटर्न में कंसल्‍टेंट फीस के तौर पर इनकम में दिखाया है.''

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कुमार को इथीरियम, प्‍लास टोकन और ऑडियो कॉइन जैसे ऑल्‍टकॉइन का भुगतान होता है. इसे वह भारतीय क्रिप्‍टोकरेंसी एक्‍सचेंज के जरिये भुनाते हैं. वह कहते हैं, ''मैं अमूमन अपनी जरूरत के अनुसार कॉइंस को कन्‍वर्ट करता हूं. मेरे ज्‍यादातर क्‍लाइंट क्रिप्‍टोकरेंसी मार्केट में हैं. लिहाजा, ट्रांजैक्‍शन आसानी और तेजी से हो जाता है. मैंने पिछले साल का अपना बोनस भी क्रिप्‍टोकरेंसी के जरिये लिया है.''

एक क्रिप्‍टोकरेंसी न्‍यूज वेबसाइट के सीईओ ने कहा, ''हम जहां क्रिप्‍टाकरेंसी में सैलरी का भुगतान करते हैं, वहां नियमों का पूरा पालन किया जाता है. कर्मचारियों को रुपये में सैलरी स्लिप दी जाती है. यह कर्मचारियों की क्रिप्‍टो में सैलरी स्लिप की आशंका को दूर सकता है.''

क्‍या है सरकार का रुख?
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने शनिवार को कहा कि सरकार गवर्नेंस में सुधार के लिए क्रिप्टोकरेंसी सहित नई तकनीकों पर विचार करने को तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद गवर्नेंस के विभिन्न पहलुओं में टेक्‍नोलॉजी को अपनाने के मजबूत समर्थक हैं. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा था कि सरकार अभी भी क्रिप्टोकरेंसी पर अपनी राय तैयार कर रही है.

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नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (भाषा) आयकर विभाग ने अपने पोर्टल पर वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लिए कर ऑडिट उपयोगिता फार्म को सक्षम किया है। यदि वित्त वर्ष 2020-21 (आकलन वर्ष 2021-22) में व्यापार की बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियां 10 करोड़ रुपये से अधिक हैं, तो आयकर कानून के तहत करदाताओं को अपने खातों का ऑडिट करवाना जरूरी है। पेशेवरों के मामले में यह सीमा 50 लाख रुपये है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए यह सीमा क्रमश: पांच करोड़ रुपये और 50 लाख रुपये है। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कर ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने कीअगर आप फुलटाइम घर से काम कर रहे हैं और आपकी कंपनी टेलीफोन, इंटरनेट, प्रिंटिंग और स्‍टेशनरी जैसे कुछ खर्चों को रीइंबर्स कर रही है तो आपको इन खर्चों पर टैक्‍स देने की जरूरत नहीं है.Richest Person of China : कभी बढ़ई का काम करते थे झोंग शानशान, आज चीन के सबसे अमीर शख्स

देश में क्रिप्‍टोकरेंसी को लेकर स्थिति बहुत साफ नहीं है. कर्मचारी और कंपनियां दोनों इसे लेकर टैक्‍स के बारे में चिंतित हैं.उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विभिन्न फॉर्मेट में चुनौतियों और अड़चनों को दूर करने के लिए सीआईआई के तहत खुदरा सेक्‍टर के लोगों का मानना है कि सरकार को एक मजबूत रिटेल पॉलिसी लानी चाहिए.एमएफआई को परिसंपत्ति में भारी वृद्धि के लिए असावधान नहीं होना चाहिए: आरबीआई

पिछले साल से अब तक बड़े उतार-चढ़ाव हुए हैं. लोगों ने कोरोना की महामारी के कहर को देखा और अब जिंदगी को पटरी पर लौटते देख रहे हैं. शायद ही यह दौर भुलाए भूलेगा. हालांकि, इससे कई सबक भी मिले हैं. ये करियर में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं. आइए, यहां उनके बारे में जानते हैं.नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (भाषा) हाजिर बाजार की कमजोर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों की कटान की जिससे वायदा कारोबार में बुधवार को निकेल वायदा भाव 2.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,532.20 रुपये प्रति किलो रह गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में नवंबर माह में डिलीवरी होने वाले निकेल अनुबंध का भाव 33 रुपये यानी 2.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,532.20 रुपये प्रति किलो रह गया। इसमें 1,539 लॉट के लिये सौदे किये गये। बाजार विश्लेषकों ने कहा किकंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में दिहाड़ी मजदूरी बढ़ी, यह है वजह

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महामारी से पहले की तुलना में मजदूरी 450-500 रुपये से बढ़कर 550-600 रुपये प्रति दिन हो गई है. वहीं, मजदूरों की उपलब्‍धता 70-75 फीसदी घटी है.

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